टैली क्या है ?

टैली एक complete एकाउंटिंग application software है जो tally solution pvt.ltd द्वारा launch किया गया है टैली का प्रयोग छोटे ,बड़े और मध्यम स्तर की कम्पनियां वित्तीय हिसाब रखने के लिए करती है वर्तमान समय में टैली का प्रयोग लगभग दुनिया के सभी देशो में एकाउंटिंग के रूप में किया जा रहा है , टैली एक सस्ती और विश्वसनीय सॉफ्टवेयर है तथा इसकी installing और प्रयोग करने की विधि भी अन्य software के अपेक्षा सरल है टैली के विभिन्न संस्करण है जिसमे से Tally ERP-9 और टैली Prime वर्तमान समय में प्रयोग किया जा रहा है tally का प्रयोग व्यापार में निम्न कार्यो को जैसे – sales, finance ,purchasing ,inventory और manufacturing के रूप में किया जाता है टैली एक भारतीय कंपनी है जिसका अविष्कार सन 1986 में  श्यामसुंदर गोएंका और उनके पुत्र भरत गोएंका ने किया था


टैली के निम्नलिखित version

  1. टैली – 3.0 (1990)
  2. टैली – 3.12 (1991) 
  3.  टैली – 4 (1992)
  4.  टैली – 4.5 (1994) 
  5. टैली – 5.4 (1996) 
  6. टैली – 6.3 (2001) 
  7. टैली – 7.2 (2005)  
  8. टैली – 8.1 (2006)  
  9. टैली – 9 (2006)
  10. (टैली ईआरपी 9 (2009)
  11. Tally Prime (2020)

इन वर्षों मेंटैली एक क्रांति से गुज़री हैजिसने शुरुआत में टैली के विभिन्न संस्करणों की खोज की , टैली का एक ही संस्करण हैजो इस बीच विभिन्न संस्करणों में दोहराया गया है। आइए नजर डालते हैं टैली के उन विभिन्न संस्करणों पर।

टैली 3.0 (1990)

टैली 3.0 टैली का पहला संस्करण है जिसका उपयोग छोटे व्यवसायों की बुनियादी लेखांकन आवश्यकताओं के लिए किया गया है। लेकिनसॉफ्टवेयर को ऑपरेशन करने के लिए बाहरी और विशेष कमांड की आवश्यकता होती है। औरयह केवल Microsoft DOS का समर्थन करता है।

टैली 3.12 (1991)

टैली 3.12 पहले वाले संस्करण यानी टैली 3.0 के समान है। यहाँकुछ सुविधाओं को बदलाव किया गया है। फिर भीयह टैली 3.0 की तरह किए गए ऑपरेशन से मिलता जुलता है

टैली 4 (1992)

टैली वर्ष 1992 में आया टैली का अगला संस्करण है। टैली 3.0 और टैली 3.12 की तरहयह भी Microsoft डॉस का समर्थन करता है और बाकी दो संस्करणों से थोड़ा अलग है।

टैली 4.5 (1994)

टैली 4.5 एक डॉस-आधारित सॉफ्टवेयर है। डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम के आधार पर कार्य करने वाला इस  सॉफ्टवेयर पर करना मुश्किल था इस लिए इसके उच्चतम भाग को मार्केट में लाने में तेजी दिखाई गयी 

टैली 5.4 (1996)

टैली 4.5 द्वारा अनुसरण किया गयाटैली 5.4 टैली का अगला संस्करण है। यह एक ग्राफिक इंटरफ़ेस संस्करण है जो आम जनता में लोकप्रिय हो गया है। एक छोटी अवधि के भीतरइसके नए संस्करण ने टैली को सर्वश्रेष्ठ लेखांकन सॉफ्टवेयर बना दिया है।

टैली 6.3 (2001)

टैली 6.3 अगला टैली संस्करण है जो विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का समर्थन करता है। यह विंडोज़ आधारित संस्करण है जिससे मुद्रण और VAT का समर्थन किया जाता है। इसके अलावाटैली 6.3 को वॉटरटाइट सुरक्षा के साथ बनाया गया है 

टैली 7.2 (2005)

टैली 7.2 वह संस्करण है जो नई अतिरिक्त सुविधाओं के साथ आया है। यह सबसे तेज़ संस्करण है जहाँ ऑपरेशन पहले की तुलना में तेज़ी से पूरे होते हैं। वैधानिक अनुपालन सुविधाओंविभिन्न वैट मूल्यों आदि सहित अतिरिक्त सुविधाओं ने इसे सामान्य संस्करणों की तुलना में अधिक अद्वितीय बना दिया।

टैली 8.1 (2006)

टैली 8.1 वह संस्करण है जो टैली में नई डेटा संरचना जोड़ता है। इस संस्करण में पीओएस और पेरोल सुविधा के मॉड्यूल को जोड़ता है। संस्करण का लोगों द्वारा अपेक्षित रूप से स्वागत नहीं किया गया था। इसलिएटैली टीम एक और संस्करण लॉन्च करने के लिए आगे बढ़ी है।

टैली 9 (2006)

टैली-9 अतिरिक्त सुविधाओं के साथ टैली का अगला संस्करण है। टैली की सुविधाओं में एक्साइजपेरोलई-टीडीएस फाइलिंग सुविधाएफबीटीटीडीएसऔर लेखा और इन्वेंट्री प्रबंधन से संबंधित अन्य नियमित विशेषताएं शामिल हैं।

टैली ईआरपी 9 (2009)

टैली ईआरपी-9 2009 के बाद टैली का नवीनतम संस्करण है। इसमें कई व्यापारिक संगठन हैं। इसमें जीएसटी गणनाचालान और पेरोल प्रक्रियारिमोट एक्सेसबहु-उपयोगकर्ता लॉगिन और लेनदेन प्रक्रियाओं सहित उन्नत विशेषताएं हैं। 

टैली erp-9 की विशेषताये 

टैली – erp9 में कुछ अलग विशेषताए शामिल की गयी हो जो ERP – 9 को विशेष पहचान देता है वे विशेषताए निम्नलिखित है 
  1. Remote Access – टैली ERP-9 कही से भी रिमोट के द्वारा डाटा एक्सेस करने की क्षमता प्रदान करता है इस फीचर से यूजर एक ID बनाता है और रिमोट एक्सेस करने की अनुमति देता है यहाँ पर रिमोट एक्सेस का मतलब हुआ की आप अपने टैली को ऑनलाइन किसी दुसरे सर्वर से जोड़ सकते है  
  2. Tally.net – Tally,Net डिफाल्ट रूप से अनुकूल माहौल बनाता है जो इन्टरनेट पर आधारित विभिन्न सेवाओ की सुबिधा के लिए पीछे से काम करता है प्रत्येक टैली .नेट की सर्विस के सक्रीय होता है 
  3. Control Center – यह नया फीचर है जो टैली Erp-9 में शामिल किया गया है यह यूटिलिटी अलग अलग जगह पर install टैली और प्रयोगकर्ता के बीच इंटरफ़ेस करती है कण्ट्रोल सेंटर की मदद से प्रयोगकर्ता account से सम्बंधित जानकारी को बनाये रख सकते है 
  4. Multiple सिलेक्शन की क्षमता – यूजर एक रिपोर्ट में कई लाईनों को एक साथ सिलेक्ट कर सकता है आवश्यकता के आधार पर इन्हें डिलीट या हाईड कर सकता है 
  5. इनफार्मेशन पैनल –  इनफार्मेशन पैनल टैली के निचले भाग में होता है इसमें पांच ब्लाक होते है प्रोडक्ट , version ,edition , कॉन्फ़िगरेशन और कैलकुलेटर इसके अतिरिक्त टैली में विभिन्न फीचर जोड़े गए है जिसे प्रैक्टिकल के माध्यम से समझा जा सकता है 

टैली प्राइम क्या है? (What is Tally prime?)

टैली प्राइम एकाउंटिंग सॉफ्टवेर ही है जो कि Tally.erp9 का न्यू अपडेट है| टैली Erp 9 काफी ज्यादा उपयोगी था और अभी भी इसमे काम करना काफी ज्यादा आसान है | लेकिन टैली प्राइम में एकाउंटिंग करना और भी ज्यादा आसान कर दिया है जो Erp9 में कमियां थी उन्हें इस टैली प्राइम में दूर किया गया और टैली को और ज्यादा बेहतर बनाया गया है |


टैली प्राइम में नये अपडेट क्या-क्या है?

(Top 10 New update in Tally Prime)
टैली में काफी ज्यादा बदलाब किये गये है हम प्रमुख दस अपडेट की बात करेंगे –
1.) सबसे पहली अपडेट टैली लोगो और थीम का है यहाँ टैली ने अपना लोगो बदल दिया है और एक नया लोगो प्रस्तुत किया है साथ ही theme color भी बदला गया है |
2.) यूजर इंटरफ़ेस काफी ज्यादा सरल बना दिया है पहले के वर्जन में हर कमांड या रिपोर्ट के लिए हमे काफी ज्यादा अंदर तक जाना पड़ता था लेकिन टैली प्राइम में सभी ऑप्शन और कमांड्स को बाहर ही रख दिया है जिससे यूजर आसानी पूर्वक उन्हें उपयोग कर पायेगा |
3.) Goto ऑप्शन इस प्राइम वर्जन का काफी ज्यादा अच्छा ऑप्शन है | पहले यदि आप वाउचर में नयी एंट्री कर रहे होते है तो और उसी समय यदि आपको बहार रिपोर्ट देखनी हो तो आपको वाउचर एंट्री या तो पूरी करनी पडती थी या फिर कैंसिल करनी पडती थी लेकिन इसमे सबसे उपर ही एक Goto बटन जोड़ दिया गया जिसे आप आसानी से रिपोर्ट देख सकते है और आपकी एंट्री भी नही जाएगी |
4.) Tally Erp9 में क्रिएट करने के लिए आपको हर बार अलग ऑप्शन में जाना होता था जैसे गोडाउन के लिए गोडाउन में जाकर क्रिएट करना होता था लेकिन आप क्रिएट सबसे पहले और बहार ही दिया गया है जिसे आप सबकुछ एक ही जगह क्रिएट कर पाएंगे | और इसी तरह सुधार करने के लिए के एक साथ ही सारे ऑप्शन आपको बहार ही मिल जाते है |
5.) पहले एक्स्ट्रा फंक्शन के लिए F11 और फिर F1, F2 या F3 में जाना पड़ता था लेकिन अब केवल F11 से सारे ऑप्शन आपके सामने आ जायेंगे |
6.) क्रिएट में आप इनएक्टिव ऑप्शन जैसे प्राइस लिस्ट , गोदाम, पेरोल अर्थात वह सभी ऑप्शन जिसके पहले आपको फीचर्स इनेबल करना पड़ता था अब वह ऑप्शन क्रिएट विंडो से अपने आप एक्टिवेट हो जायेंगे |
7.) टैली प्राइम में शॉर्टकट की में भी परिवर्तन किये गया है जैसे कम्पनी बंद अब Alt + F1 की जगह Ctrl + F3 से होगी | ईमेल Ctrl+M से वाउचर विंडो चेंज अब Ctlr + H से होगी | और कॉपी पेस्ट भी आप अब Ctrl + C और Ctrl + V से कर पाएंगे |
8.) टैली प्राइम में ऊपर की तरफ एक मेन्य जोड़ दिया गया है जिसमे company इन्फो और import Export के फीचर्स दिए गये है |
9.)टैली प्राइम में आप रिपोर्ट को और सरलता से और अलग अलग व्यू में देख सकते है |
10) टैली प्राइम में, क्रिएट कंपनी करने के साथ ही आपके सामने फीचर्स की विंडो ओपन हो जाती जिससे आप आसानी से GST जैसे फीचर्स हो पहेले ही इनेबल या डिसएबल कर सकते है |

नये वर्जन को काफी ज्यादा सरल बनाया गया है इसमे पूरा ध्यान रखा गया है कि समय की बचत हो और रिपोर्ट सही तरीके से बने यह टैली प्राइम टैली सलूशन का काफी अच्छा अपडेट है 
टैली के पुराने वर्जन में यदि आपने काम किया है तो नये वर्जन में आपको कोई भी परेशानी नही आएगी सभी ऑप्शन आपको आसानी से मिल जायेंगे |

What is Accounting (लेखांकन क्या है )

एकाउंटिंग का हिंदी अर्थ है लेखांकन , लेखांकन दो शब्दों से मिलकर बना है  लेख + अंकन  जहाँ  लेख का  सन्दर्भ लिखने तथा अंकन का अर्थ अंको से लिया गया है यदि इस वाक्य को परिभाषित किया जाये तो 
लेखांकन किसी व्यक्ति , समूह ,या समुदाय द्वारा किये वित्तीय खर्च को अंको के रूप में विवरण प्रस्तुत करने की एक विधि है 
 नोट –  यदि आप टैली में एकाउंटिंग सिख रहे तो आपको कुछ शब्दों के परिभाओ से परिचित होना पड़ेगा जिससे आपको एकाउंटिंग सीखते समय कठिनाई न हो  , एकाउंटिंग से जुड़े कुछ परिभाषाएं निचे लिखे गए है
  1. Business  – धन कमाने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति द्वारा कीया कार्य Business कहलाता है 
  2. Capital – कैपिटल का हिंदी अर्थ पूँजी होता है जो किसी व्यवसाय  को शुरू करने के लिए जरुरी है 
  3. Capital Account  – पूंजीपती के खाते को कैपिटल अकाउंट के नाम से जाना जाता है 
  4. Debtors – इस शब्द का हिंदी अर्थ कर्जदार होता है अर्थात जिससे व्यवसाय में निश्चित राशी लेनी होती है उसे Debtors कहा जाता है 
  5. Creditors – इस शब्द का हिंदी अर्थ करदाता होता है अर्थात जिसको  व्यवसाय में निश्चित राशी देनी होती है उसे Creditors कहा जाता है 
  6. Business Transaction – यह एक वित्तीय घटना है जो किसी व्यवसाय में सामानों के विक्री और खरीद विवरण को दर्शाता है 
  7. Cash Transaction – किसी व्यवसाय में हुए सभी नकद  के रूप में लेन -देन को Cash Transaction कहा जाता है  
  8. Financial year – किसी वर्ष के 31 मार्च और 1 अप्रैल के बीच के समय को Financial year (वित्तीय वर्ष )
  9. Financial Expense – किसी व्यवसाय में पुरे वर्ष में हुए खर्च को Financial Expense कहा जाता है 
  10. Liability- यह वह धन होता है जो दुसरो द्वारा व्यवसाय में दिया जाता है जैसे बैंक द्वारा लिया गया लोन 
  11. Ledger- इस शब्द का अर्थ अकाउंट होता है इसके माध्यम से किसी व्यक्ति या वास्तु का विवरण व्यसाय में रखा जाता है 
  12. profit – जब व्यवसाय में हमें किसी वस्तु की बिक्री करने पर खरीद से अधिक राशी प्राप्त हो तो उस राशी को प्रॉफिट कहा जाता है 
  13. Loss – जब व्यवसाय में हमें किसी वस्तु की बिक्र करने पर खरीद से कम  राशी प्राप्त हो तो उस राशी को loss  कहा जाता है 
  14. Goods –  जिन वस्तुओ का प्रयोग का हम व्यवसाय करते है उसे गुड्स कहा जाता है 
  15. Assets – यह महंगे वस्तुओ को परिभाषित करता है जैसे फर्नीचर , vehicle , इमारते इत्यादि 

अकाउंट कितने प्रकार के होते है ( How many type of Accounts )

टैली में अकाउंट को तीन भागो में बांटा गया है 
  1. Personal Account – सभी व्यक्ति ,समुदाय, या समूह जैसे ट्रस्ट ,बैंक या कंपनियों के खाते को पर्सनल अकाउंट कहा जाता है उदहारण – Vijay,Manoj, sales A/C ,sbi Bank इत्यादि 
  2. Real Account  – इसके अंतर्गत सभी महँगी वस्तुए और सामान शामिल होते है जैसे – Cash A/C ,Furniture,Building A/C 
  3. Nominal Account  – व्यवसाय से सम्बंधित सभी आय और खर्च Nominal account के अंतर्गत आते है जैसे –   Salary A/C , Rent A/C Payment A/C ,  Electricity Bill A/C etc 

Tally ERP-9 / Prime में group क्या होते है और इसके क्या महत्व है / What is group in Tally erp-9 / Prime and what its Important

Tally में ग्रुप एक बहुत ही मुख्य भूमिका निभाता है जब हम टैली में किसी व्यक्ति ,समूह या वस्तु का खाता बनाते है तो उस व्यक्ति या वस्तु के अंतर्गत हमें किसी एक ग्रुप का चयन करना होता है , ग्रुप चयन के द्वारा ही हमें यह पता चलता है की जिस वस्तु या व्यक्ति का खाता हम टैली में बना रहे है वो हमसे किस प्रकार से जुड़ा हुआ है अर्थात जबतक हमें यह नहीं पता होगा की जो व्यक्ति हमारे व्यवसाय से जुड़ा है वो creditor है या debtor या कंपनी का मालिक , तबतक हमें उस व्यक्ति से लेन देन करने में कठिनाई होगी और व्यवसाय को हानी का सामना करना पड़ सकता है 
टैली में कुल ग्रुप की संख्या 28 है परन्तु इन ग्रुप को दो भागो में बांटा गया है | 

(1) Primary Group  – प्राइमरी ग्रुप में सभी ग्रुपों की संख्या 15 है इन सभी ग्रुप को 2 भागो में विभक्त किया गया है 

 (a) Revenue – यह ग्रुप व्यवसाय के राजस्व को दर्शाते है यह 6 प्रकार के होते है 
  1. DIRECT EXPENSE 
  2. INDIRECT EXPENSE 
  3. DIRECT INCOME
  4. INDIRECT INCOME
  5. SALE ACCOUNT
  6. PURCHESE ACCOUNT

1- DIRECT EXPENSE- वह खर्च जो किसी समान को बनाने में लगता है उसे DIRECT EXPENSE के UNDER में रखते है |

2- INDIRECT EXPENSE – वह खर्च जो किसी समान को बेचने में लागत के रूप में लगता है उसेINDIRCT EXPENSE के अन्तर्गत में रखते है |

3 – DIRECT INCOME – डायरेक्ट इनकम वह इनकम है जो सीधे व्यवसाय गतिविधियों के माध्यम से अर्जित की  जाती है  उसे डायरेक्ट इनकम के अंतर्गत  रखा जाता है |

4-INDIRECT INCOME-वह आय जो गैरव्यवसायिक गतिविधियों के माध्यम से अर्जित किया जाता है | उसे INDIRECT इनकमकेअंतर्गत  रखा जाता है |

5 – SALE ACCOUNT– जब कोई समान किसी को बेचा जाता है तो उसे सेल  अकाउंट के अंतर्गत  रखा जाता  है|

6 – PURCHESE ACCOUNT– जब कोई समान किसी से  ख़रीदा जाता है तो उसे PURCHESE अकाउंट के अंतर्गत रखा  जाता है |

 (b) Non- Revenue – यह ग्रुप व्यवसाय के राजस्व को नहीं दर्शाते इनकी कुल संख्या 9 है |
  1. CAPITAL ACCOUNT

  2. CURRENT ESSETS
  3. FIXED ESSETS
  4. CURRENT LIABILITY
  5. LOAN LAIBILITES
  6. SUSPENSE ACCOUNT
  7. INVESMENTACCOUNT
  8. BRANCHES INDIVISAION
  9. MISCLAINIOUSEXPENCE   

CAPITAL ACCOUNT- जब बिज़नेस को स्टार्ट करने के लिए कोई व्यक्ति पैसा लगता है तो उसे CAPITAL ACCOUNT के अंतर्गत रखते है |

CURRENT ESSETS– जब कोई सम्पति हमारे पास थोड़े समय के लिए रहता है उसे CURRENT ESSETS के अंतर्गत रखते है |

FIXED ESSETS– वह सम्पति जो हमारे पास अस्थायी रूप में मौजूद रहता है उसे FIXED ESSETS के अंतर्गत में रखते है |

CURRENT LIABILITES– वह कर्ज जो हमारे पास थोड़े समय के लिए रहता है उसे CURRENT LAIBILITES के अंतर्गत रखते है |

LOAN LAIBILITES– वह कर्ज जो हमारे पास निश्चित समय के लिए रहता है | उसे LOAN LAIBILITES के अंतर्गत रखते है |

SUSPENSE ACCOUNT– जब व्यापार में यह समझ ना आये समान बेचा गया है या ख़रीदा गया है तो उसे SUSPENSE ACCOUNT के अंतर्गत रखते है |

INVESMENT ACCOUNT– जब कोई पैसा लाभ कमाने केउद्देश्य से किसी कम्पनी में लगते है तो उसे INVESMENT अकाउंट के अंतर्गत रखते है |

BRANCHESE INDIVISION– शाखाओं के लेन देन को BRANCHESE INDIVISION कहते है |

MISCLAINIOUS EXPENCE– जब कोई खर्च व्यर्थ में किया जाता है तो उसे MISCLAINIOUS EXPENCE के अंतर्गत में रखा जाता है |  

(2) Secondary Group  इस ग्रुप की कुल संख्या 13 है 

  1. CASH IN HAND
  2. BANK ACCOUNT
  3. SUNDRY CREDITOR
  4. SUNDRY DEBITOR
  5. DEPOSITE
  6. STOCK IN HAND
  7. LOAN& ADVANCE
  8. DUITES& TEXES
  9. PROVISON
  10. SECURED LOAN
  11. UNSECURED LOAN
  12. Bank OD(over Draft )  or  OCC (open Credit Cash )
  13. Resurve and Surplus 

1 CASH IN HAND –जब कोई पैसा हमारे पास नकद के रूप में रहता है तो उसे CASH IN HAND के अंतर्गत रखते है

2 BANK ACCOUNT –बैंक से सम्बन्धित खाते को BANK अकाउंट के अंतर्गत रखते है |

3 SUNDRY CREDITOR–जब किसी से उधार समान लेते है तो उसेSUNDRY CREDITOR के अंतर्गत रखते है |

4 SUNDRY DEBITOR –जब किसी को उधार समान बेचते है तो उसे SUNDRY DEBITOR के अंतर्गत रखते है |

5 DEPOSITE–इसके अंतर्गत वह पैसा आता है जिसको हम किसी बैंक में निश्चित समय के लिए रखते है |

6 STOCK IN HAND–जो समान हमारे पास मौजूद होता है उसे STOCK IN HAND के अंतर्गत रखते है |

7 LOAN& ADVANCE–जब किसीको हम उधार पैसा या कर्ज देते है तो उसे LOAN & ADVANCE के अंतर्गत रखते है |

8 DUITES& TEXES –इसकेअंतर्गत वह सभी टेक्स आते है जो सरकार द्वारा लगाया जाता है | T.A ,D.A ,V.A.T, G.S.T

9 PROVISON–जबकिसी अशुद्ध ऋण के लिए जो पैसा पहले से इक्कठा किया जाता है उसको PROVISON के अंतर्गत रखते है |

10 SECURED LOAN–वह लोन जो हमें किसी बैंक से प्राप्त होता है उसे SECURED LOAN के अंतर्गत रखते है |

11 UNSECURED LOAN–वह पैसा जो हमें किसी व्यक्ति से प्राप्त होता है उसे UNSECURED लोन के अंतर्गत रखते है |

12 BANK OD or OCC – जब कोई लोन किसी विशवाशपात्र व्यक्तिको लिमिट से ज्यादा पैसा देता है तो उसे BANK OD or OCC के अंतर्गत रखते है |

13RESURVE & SURPLUS–ये ग्रुप capital अकाउंट के UNDER में आता है अर्थात् जब हमारी पूँजी कम हो जाती है तो दोबारा पूँजी लगते है तो उसे RESURVE& SURPLUS के अंतर्गत रखते है |


 Create ledger in Tally Prime

टैली प्राइम में कम्पनी बनाने के बाद आपको वाउचर एंट्री के लिए ज़रूरी है कि आप लेजर क्रिएट करना क्यूंकि बिना लेजर क्रिएट करें आप बिल एंट्री या वाउचर एंट्री नही कर पाएंगे | 

How To Create Ledger in Tally Prime


सबसे पहले हमारे पास कुछ एंट्री होना चाहिये जिसके आधार पर हम लेजर या अकाउंट बनायेंगे तो इसलिए अभी हमने कुछ एंट्रीस मानी है –

  1. रुपेश ने 1-4-2021 को  200000 के साथ व्यापार प्रारम्भ किया |


  2. राम से 10000 रूपये का मॉल 2-4-2021 में खरीदा गया


  3. 3000

    रूपये का 02-04-2021 में  मॉल खरीदा गया  |


  4. 03-04-2021 में भवन  खरीदा गया 10000

    रूपये में |


  5. नगद वेतन दिया 2500 रुपये 05-04-2021  |


  6. 8000

    रूपये का माल 10-04-2021 में बेचा  गया |


  7. विनय से 4000

    रूपये का माल 12-04-2021 में खरीदा गया |


  8. अपने बिज़नस के लिए 5000

    रूपये का फर्नीचर 15-04-2021 में खरीदा गया |


  9. 1500

    रूपये लाइट का बिल 18-04-2021 को दिया |


  10. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में 1500

    रूपये से 20-4-2021 में एक खाता खोला गया |


  11. राम को 22-04-2021 को 1800

    रूपये का भुगतान दिया गया |


  12. नगद 8000

    रूपये का माल 27-04-2021 को बेचा गया |


  13. 28-04-2021 को 2500

    रूपये का कमीशन दिया गया |


  14. 300 रूपये मजदूरी 28-04-2021 में डी गयी |


  15. मालिक ने अपने निजी खर्च के लिए व्यापार से 2000 रूपये 29-04-2021 में निकाले |

अब उपर दी गयी एंट्री के आधार पर हम टैली प्राइम में खाते खोलेंगे –

लेजर या खाते खोलने के लिए सबसे पहले कम्पनी बना ले जैसा हमने पहले सिखा था उसके बाद Gateway of Tally की विंडो पर दिए गये ऑप्शन Create की मदद से लेजर बनायेंगे |

Create Ledger in Tally Prime In Hindi ,Account Create In Tally With Shortcut Key


Create Ledger in Tally Prime In Hindi | Account Create In Tally With Shortcut Key

ऊपर दी एंट्री के हिसाब से सबसे पेहला लेजर रुपेश का बनेगा फिर इसके बाद उसका कोई यदि दूसरा नाम होतो वह नाम हम  उर्फ़ (Alias) में  दे देंगे | 

अब सबसे महत्वपूर्ण है लेजर में अंडर ग्रुप पहचाना | अभी रुपेश अंडर Capital account आएगा क्यूंकि कैपिटल का अर्थ है पूंजी और पूंजी वह जो मालिक लगता है | 

इसलिए जब भी किसी भी बिज़नस में मालिक का अकाउंट खुलेगा तो सदेव अंडर ग्रुप capital Account ही होगा | इसके बाद आप यदि बाकि डिटेल्स देना चाहे तो दे सकते है लेकिन अभी यह जानकारी देना ज़रूरी नही है |


Create Ledger in Tally Prime In Hindi | Account Create In Tally With Shortcut Key


इसी प्रकार दूसरी एंट्री में राम से मॉल खरीदा गया है तो यहाँ Ram के नाम का लेजर क्रिएट होगा जिसे अंडर Sundry Creditors रखा जायेगा क्यूंकि जिनसे भी हम माल खरीदते है वह सब Sundry Creditor कहलाते है |


Create Ledger in Tally Prime In Hindi | Account Create In Tally With Shortcut Key
Create Sundry Creditor Account


तीसरी एंट्री में अकाउंट Purchase नाम से खुलेगा और अंडर भी परचेस ही आएगा | क्यूंकि मॉल खरीदा या सामान खरीदा को परचेस कहा जाता है |

 

Create Purchase Account


 

अगली एंट्री में भवन खरीदा चूँकि यह मॉल नही है इसलिए परचेस अकाउंट नही आएगा यहाँ अकाउंट Building या Bhavan नाम से खोला जायेगा जिसे अंडर Fixed Assets (स्थायी सम्पति) ग्रुप में रखा जायेगा क्यूंकि Building एक स्थायी सम्पति है| 

 

Create Account (ledger) In tally Prime


 

इसी प्रकार बाकि बचे खाते भी खोलेंगे यह ग्रुप पिछली पोस्ट में समझाएं गये है आप वह पोस्ट ज़रूर पढ़े जिससे आपको आसानी हो जाएगी |

 

Ledger Name                                Under Group


1. Rupesh A/c                                    Capital

2. Ram A/c                                        Sundry Creditor

3. Purchase A/c                                Purchase Account

4. Building A/c                                Fixed Assets

5. Salary A/c                                    Indirect Expenses

6. Sales A/c                                      Sales Account

7.Vinay A/c                                      Sundry Creditor

8. Furniture A/c                                Fixed Assets

9.Light Bill                                       Indirect Expenses 

10. SBI A/c                                        Bank Account

11.———                                        ————

12.———                                        ————

13.Commission A/c                            Indirect Expenses

14. Wages a/c                                    Direct Expenses

15. Drawing A/c                                Capital a/c

 

Fixed Assets में उन अकाउंट को रखेंगे जो स्थायी सम्पति के अंतर्गत आते है जैसे बिल्डिंग, फर्नीचर, मशीनरी, कार, जमीन आदि 

इसी प्रकार Indirect Expenses ग्रुप में उन एकाउंट्स को रखेंगे जो खर्चो के अंतर्गत आते है | ऐसा रुपया जो खर्च हो जायेगा | जिसको बाद में प्राप्त न किया जा सके जैसे किराया देना (RENT), लाइट बिल, विज्ञापन खर्चा , वेतन देना , कमीशन देना आदि |अर्थात पैसे आने के बाद जो खर्चे होते है सब सभी अकाउंट अंडर  इन डायरेक्ट एक्स्पेंसेस ग्रुप में आते है |

 जबकि direct एक्सपेंस में उन खातो को रखेंगे जिनका भुगतान उसी समय करना होता है अर्थात भविष्य पैसा आने के बाद पैसा नही दिया जाता वल्कि भुगतान प्रतक्ष्य रूप से दिया जाता है जैसे मजदूरी देना, भाड़ा देना आदि | 

Bank Account का खता Bank Account Group में हो आएगा और Sales A/c का खाता हमेशा Sales Accounts के अंतर्गत आएगा तथा इसी प्रकार Purchase Accounts का खाता हमेशा Purchase ग्रुप में ही आएगा |

तो इस तरह हम वाउचर एंट्री करने के लिए खाते टैली प्राइम में बना सकते है हम यदि चाहे तो वाउचर एंट्री करते समय भी  खाते शॉर्टकट कि , की मदद से बना सकते है | Tally  Prime  में खाता बनाने की Shortcut Key Alt+ C है |

खाते बनने के बाद अब हम इन खातो में एंट्री करेंगे एंट्री करने के लिए हमे वाउचर विंडो पर जाना होगा |


Next (Accounting Voucher entry in Tally Prime)

और अधिक –

 टैली प्राइम परिचय 

टैली प्राइम में खाते बनाना  

टैली प्राइम कैसे डाउनलोड करें ? 

टैली प्राइम में स्टॉक कैसे मेंटेन करें? 

टैली प्राइम में स्टॉक जर्नल एंट्री करना 

टैली प्राइम में प्राइस लिस्ट कैसे बनाएं ?

टैली प्राइम में बैकअप और रिस्टोर कैसे करें?

टैली प्राइम में टैली वोल्ट पासवर्ड कैसे लगाते है?

टैली प्राइम में वाउचर एंट्री कैसे करे ? 

टैली प्राइम में गोदाम (Godowns) कैसे बनाते है?

टैली प्राइम में स्टैण्डर्ड प्राइस कैसे सेट करें? 

टैली प्राइम में मल्टीप्ल एड्रेस मेंटन कैसे करें?

टैली प्राइम में separate billed and actual Quantity Column?

टैली प्राइम में कास्ट सेंटर कैसे बनाते है?

टैली प्राइम में चेक प्रिंटिंग कैसे करें?

टैली प्राइम में कम्पनी में लोगो कैसे लगायें?

टैली प्राइम में ब्याज की गणना कैसे करें?

टैली प्राइम में दो यूनिट का उपयोग एक साथ कैसे करें?

टैली प्राइम में स्प्लिट ऑप्शन क्या है?


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